सत्य सुनकर वो भी बोलेगी भारतमाता की जय

‘मेरे पिता को युद्ध ने मारा है, पाकिस्तान ने नहीं’ पता नहीं यह वाक्य उस बेटी की मानसिकता को दर्शाता है अथवा नहीं किन्तु इतना तो सच है कि इसके सहारे बहुतों की मानसिकता उजागर हो गई. राष्ट्रवाद और राष्ट्रविरोध की बारीक रेखा के बीच ऐसे किसी भी मुद्दे पर बहुत गंभीरता से विचार किये जाने की आवश्यकता होती है. देखा जाये तो किसी ने भी, चाहे वे इस बयान के पक्ष में खड़े हों या फिर वे जो इसके विरोध में उतरे हुए हैं, गंभीरता से विचार करने का…

Read More

संवैधानिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग न होने दें

आज हम सभी के लिए गौरव का दिन है. आज ही के दिन सन 1950 में हमारे संविधान को सम्पूर्ण देश में लागू किया गया. इसके लागू होते ही हमारा देश लोकतान्त्रिक व्यवस्था के साथ-साथ एक गणराज्य के रूप में भी जाना जाने लगा. ये अपने आपमें अद्भुत है कि हमारे देश में केन्द्रीय सत्ता की प्रभुता के साथ-साथ राज्यों की प्रभुता को भी बराबर से स्वीकारा गया है. संविधान निर्माताओं ने केंद्र के साथ-साथ राज्यों को भी पर्याप्त अधिकार दिए. नागरिकों को व्यापक अधिकार प्रदान किये. कर्तव्यों का निर्वहन,…

Read More

चुनाव सुधारों की तरफ बढ़े निर्वाचन आयोग

देश वर्तमान में परिवर्तनों, संशोधनों के दौर से गुजर रहा है. एक तरफ केंद्र सरकार ने जहाँ नोटबंदी के द्वारा कालेधन पर चोट करने का सन्देश दिया वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था को कैशलेस बनने का रास्ता भी दिखाया है. केंद्र सरकार की साफ़ नीयत को देखकर अब निर्वाचन आयोग ने भी चुनाव सुधारों सम्बन्धी पहल करने की मंशा ज़ाहिर की है. एक व्यक्ति के दो जगह से चुनाव लड़ने को प्रतिबंधित करने, दो हजार रुपये से अधिक के गुप्त चंदे पर रोक लगने, उन्हीं राजनैतिक दलों को आयकर में छूट दिए…

Read More

विसंगति, विद्वेष बढ़ाएगा वेतन का व्यापक अंतर

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देकर चुनावी दाँव चल दिया है. राज्य वेतन आयोग की सिफारिशों को ज्यों का त्यों स्वीकार लेना इसी बात की तरफ इंगित करता है कि ये विशुद्ध चुनावी दृष्टिकोण से अपनाया गया फैसला है. सरकार ने कर्मचारियों के न्यूनतम और अधिकतम वेतन के विशाल अंतर को नजरअंदाज करके उसे सहर्ष स्वीकृति दे दी है. इस निर्णय से राज्य के सत्ताईस लाख कर्मियों को लाभ पहुँचेगा. वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिए जाने के बाद अब राज्य कर्मियों…

Read More

सुरक्षा को चुनौती देती जाली मुद्रा : समाधान

समाज में जबसे मुद्रा का प्रचलन प्रारम्भ हुआ है, जाली मुद्रा का निर्माण भी उसी के समकालीन दृष्टिगत है। तत्कालीन परिस्थितियों में जाली मुद्रा के निर्माण का उद्देश्य आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना और स्वयं को आर्थिक रूप से मजबूत करना रहा होगा। लेकिन वर्तमान में समय-काल-परिस्थितियों और तकनीकी विकास के चलते जाली मुद्रा के निर्माण का उद्देश्य परिवर्तित हो गया। आज एक देश दूसरे देश के आर्थिक ढांचे को कमजोर करने और उस सम्बन्धित देश की अर्थव्यवस्था को धराशाही करने के लिए जाली मुद्रा का प्रयोग कर रहा है।…

Read More