आँखों में नमी, दिल में गर्व : सेलुलर जेल के दर्शन : अंडमान-निकोबार यात्रा

सेलुलर जेल, जहाँ एक तरफ अंग्रेजी शासन में अमानवीय यातनाओं का केंद्र रहा वहीं दूसरी तरफ आज आज़ाद भारत में क्रांतिकारियों के तीर्थस्थल के रूप में पहचाना जा रहा है. ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए, जो देश की आज़ादी में न्योछावर हो चुके क्रांतिकारियों के प्रति आदर-सम्मान का भाव रखता है, सेलुलर जेल किसी भी तीर्थ से कम नहीं है. कभी सोचा नहीं था कि देश की मुख्यभूमि से हजारों किमी दूर समुद्र के बीच स्थित पोर्ट ब्लेयर में इस जगह के दर्शनार्थ लोगों का हुजूम पहुँचता होगा. सेलुलर…

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सत्य सुनकर वो भी बोलेगी भारतमाता की जय

‘मेरे पिता को युद्ध ने मारा है, पाकिस्तान ने नहीं’ पता नहीं यह वाक्य उस बेटी की मानसिकता को दर्शाता है अथवा नहीं किन्तु इतना तो सच है कि इसके सहारे बहुतों की मानसिकता उजागर हो गई. राष्ट्रवाद और राष्ट्रविरोध की बारीक रेखा के बीच ऐसे किसी भी मुद्दे पर बहुत गंभीरता से विचार किये जाने की आवश्यकता होती है. देखा जाये तो किसी ने भी, चाहे वे इस बयान के पक्ष में खड़े हों या फिर वे जो इसके विरोध में उतरे हुए हैं, गंभीरता से विचार करने का…

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संवैधानिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग न होने दें

आज हम सभी के लिए गौरव का दिन है. आज ही के दिन सन 1950 में हमारे संविधान को सम्पूर्ण देश में लागू किया गया. इसके लागू होते ही हमारा देश लोकतान्त्रिक व्यवस्था के साथ-साथ एक गणराज्य के रूप में भी जाना जाने लगा. ये अपने आपमें अद्भुत है कि हमारे देश में केन्द्रीय सत्ता की प्रभुता के साथ-साथ राज्यों की प्रभुता को भी बराबर से स्वीकारा गया है. संविधान निर्माताओं ने केंद्र के साथ-साथ राज्यों को भी पर्याप्त अधिकार दिए. नागरिकों को व्यापक अधिकार प्रदान किये. कर्तव्यों का निर्वहन,…

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चुनाव सुधारों की तरफ बढ़े निर्वाचन आयोग

देश वर्तमान में परिवर्तनों, संशोधनों के दौर से गुजर रहा है. एक तरफ केंद्र सरकार ने जहाँ नोटबंदी के द्वारा कालेधन पर चोट करने का सन्देश दिया वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था को कैशलेस बनने का रास्ता भी दिखाया है. केंद्र सरकार की साफ़ नीयत को देखकर अब निर्वाचन आयोग ने भी चुनाव सुधारों सम्बन्धी पहल करने की मंशा ज़ाहिर की है. एक व्यक्ति के दो जगह से चुनाव लड़ने को प्रतिबंधित करने, दो हजार रुपये से अधिक के गुप्त चंदे पर रोक लगने, उन्हीं राजनैतिक दलों को आयकर में छूट दिए…

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विसंगति, विद्वेष बढ़ाएगा वेतन का व्यापक अंतर

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देकर चुनावी दाँव चल दिया है. राज्य वेतन आयोग की सिफारिशों को ज्यों का त्यों स्वीकार लेना इसी बात की तरफ इंगित करता है कि ये विशुद्ध चुनावी दृष्टिकोण से अपनाया गया फैसला है. सरकार ने कर्मचारियों के न्यूनतम और अधिकतम वेतन के विशाल अंतर को नजरअंदाज करके उसे सहर्ष स्वीकृति दे दी है. इस निर्णय से राज्य के सत्ताईस लाख कर्मियों को लाभ पहुँचेगा. वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिए जाने के बाद अब राज्य कर्मियों…

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