विवेकानन्द रॉक मेमोरियल को दूर से निहारते रहे

बहुप्रतीक्षित यात्रा उरई से बस से शुरू हुई जो झाँसी पहुँच ट्रेन में बदल गई. कई वर्षों से लगातार योजना बन रही थी, कन्याकुमारी जाने की. उद्देश्य कन्याकुमारी घूमना नहीं, दक्षिण के दर्शनीय स्थल देखना नहीं वरन पावन शिला के दर्शन करना था. वो पावन शिला जिसे हम सभी ‘विवेकानन्द रॉक मेमोरियल’ के नाम से जानते हैं. उस पावन शिला का स्पर्श करना था जहाँ देश के विराट व्यक्तित्व स्वामी विवेकानन्द ने तीन दिन, तीन रात ध्यान कर तीन सागरों के शोर को अपने में समाहित कर लिया था. उस…

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