दो दिन की ट्रेन यात्रा में दो आत्माएँ

वर्षों की चिरप्रतीक्षित यात्रा शुरू होने वाली थी. सभी तैयारियाँ लग चुकी थीं. ट्रेन के दो दिन, दो दिनों के साथ-साथ नई , अनजान जगह पर परिचित खाद्य पदार्थ मिलने, न मिलने का संकट देखते हुए उसकी भी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गईं थी. समयबद्ध रूप से आरम्भ हुई यात्रा रोमांचक न होते हुए भी रोमांच का अनुभव करवा रही थी. इसके पीछे शायद उस जगह का भ्रमण करना रहा हो जिसने अत्याल्पायु में सम्पूर्ण विश्व को एक रास्ता दिखाने का काम किया. जी हाँ, ये चिरप्रतीक्षित यात्रा थी कन्याकुमारी…

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तिरंगे को सच्ची सलामी अभी बाकी है

          जब पहली आधी रात को तिरंगा फहराया गया था, तब हवा हमारी थी, पानी हमारा था, जमीं हमारी थी, आसमान हमारा था तब भी जन-जन की आँखों में नमी थी। पहली बार स्वतन्त्र आबो-हवा में अपने प्यारे तिरंगे को सलामी देने के लिए उठे हाथों में एक कम्पन था मगर आत्मा में दृढ़ता थी, स्वभाव में अभिमान था, स्वर में प्रसन्नता थी, सिर गर्व से ऊँचा उठा था। समय बदलता गया, परिदृश्य बदलते रहे किन्तु तिरंगा हमेशा फहरता रहा, हर वर्ष फहराया जाता रहा। सलामी हर बार दी जाती…

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शारीरिक दुराचार के लिए जिम्मेवार है अश्लील चित्रण

सामाजिक विकास के साथ-साथ महिलाओं के साथ छेड़खानी, बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि हो रही है. ऑफिस, बाजार, पार्क, सफर या फिर अन्य कोई जगह, महिलायें खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं. महिलाओं के साथ-साथ मासूम बच्चियाँ भी यौन शोषण का शिकार होने लगी हैं. दिनों-दिन बढ़ती बलात्कार की घटनाएँ समाज में आ रहे मानवीय मूल्यों के अवमूल्यन का दुष्परिणाम हैं. यौन-कुंठा का इतना वीभत्स रूप शायद की कभी देखने को मिला हो. नैशनल क्राइम ब्यूरो के अनुसार देश में प्रतिदिन 50 महिलाओं की इज्जत लूट ली जाती…

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