नक्सलवाद रोकथाम के लिए रणनीति बदलनी होगी

            देश वर्तमान में विभिन्न सामाजिक, आर्थिक समस्याओं से जूझने के साथ ही साथ कतिपय उग्र घटनाओं से भी दो-चार हो रहा है। इस तरह की घटनाओं में आतंकवाद, क्षेत्रवाद, वर्ग-संघर्ष के अतिरिक्त हम नक्सलवाद को भी देख सकते हैं। नक्सलवाद किसी तरह का आतंकवाद न होकर भी खूनी संघर्ष बना हुआ है। समय के लगातार परिवर्तन और इसके सापेक्ष होते आये शक्ति प्रदर्शन ने नक्सलवाद को हिंसा के समीप खड़ा कर दिया है। प्रसिद्ध नेता माओत्से तुंग की आदर्श खूनी क्रांति की उक्ति पावर कम्स आउट ऑफ़ द बैरल…

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सेना, सैनिकों के सम्मान से खिलवाड़ उचित नहीं

कुछ समय पूर्व देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी सैनिकों का सम्मान किये जाने की बात कहते दिखे थे. ऐसा कहने के पीछे उनका मंतव्य सार्वजनिक स्थानों पर भी मिलते सैनिकों का सम्मान करना था. जैसा कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर किसी विदेशी एअरपोर्ट पर वहाँ की सेना के प्रति सम्मान प्रकट करते नागरिकों के वायरल हुए वीडियो में दिखा था. हमारे देश में सेना के प्रति, सैनिकों के प्रति आम नागरिकों में सम्मान की भावना गहराई तक है किन्तु शायद ही वो सम्मान किसी सार्वजनिक स्थल पर प्रकट…

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विकास के सहारे बदलेगी छवि

उत्तर प्रदेश में पहले भी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने की आवाज़ उनके समर्थकों की तरफ से उठती रही थी. चुनाव परिणामों में प्रचंड बहुमत पाने के बाद ऐसी आवाजें भले ही और तेजी से उठी हों किन्तु किसी को अंदाज़ा नहीं था कि भाजपा आलाकमान उनके नाम पर अपनी अंतिम स्वीकृति देगा. योगी आदित्यनाथ का नाम बतौर मुख्यमंत्री घोषित होना अपने आपमें चौंकाने वाला निर्णय ही कहा जायेगा. इसके पीछे मूल कारण केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सबका साथ, सबका विकास की राजनीति के साथ आगे बढ़ना रहा…

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मड वोलकेनो की सैर वाया जरावा जनजाति : अंडमान-निकोबार यात्रा

                                        अंडमान-निकोबार की नीले समुद्री जल और नैसर्गिक प्राकृतिक सुन्दरता को दिल-दिमाग में अभी पूरी तरह बसा भी नहीं पाए थे कि वहाँ से वापसी का दिन दिखाई देने लगा. लौटने से पहले उस जगह को देखने का कार्यक्रम बना जिस जगह के बारे में पहले दिन से सुनते आ रहे थे. वो जगह थी बाराटांग द्वीप, जो पोर्टब्लेयर से सौ-सवा सौ किमी से अधिक की दूरी पर है. अंडमान-निकोबार द्वीप…

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आँखों में नमी, दिल में गर्व : सेलुलर जेल के दर्शन : अंडमान-निकोबार यात्रा

सेलुलर जेल, जहाँ एक तरफ अंग्रेजी शासन में अमानवीय यातनाओं का केंद्र रहा वहीं दूसरी तरफ आज आज़ाद भारत में क्रांतिकारियों के तीर्थस्थल के रूप में पहचाना जा रहा है. ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए, जो देश की आज़ादी में न्योछावर हो चुके क्रांतिकारियों के प्रति आदर-सम्मान का भाव रखता है, सेलुलर जेल किसी भी तीर्थ से कम नहीं है. कभी सोचा नहीं था कि देश की मुख्यभूमि से हजारों किमी दूर समुद्र के बीच स्थित पोर्ट ब्लेयर में इस जगह के दर्शनार्थ लोगों का हुजूम पहुँचता होगा. सेलुलर…

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